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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
28 Mar 2021·1 min read·

होली में !

सद्भाव की घूंटी जरा पिलाओ होली में , भगवा, नीला और रंग हरा मिलाओ होली में !

तुम भी तो जरा नरमी लाओ अपनी बोली में , दुश्मन को भी दिल से गले लगाओ होली में !

श्रद्धा सा अर्पित प्रेम समर्पित दामन द्वारे , निर्गुण, सगुण मिलाकर द्विगुण बनाओ होली में !

चुनाव के आगे घुटने टेके देख कोरोना ने , पर, सरकारी पाबंदी है यूँ अपनी होली में !

राजनीत की दहन होलिका सजाओ होली में , सियासत की ना यूँ याद दिलाओ होली में !

©कुमार