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Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
30 May 2021·1 min read·

जल रहा है पूरा शहर

संकट के इस कालखंड में ये कैसी अनहोनी है ? जल रहा है पूरा शहर हर तरफ छाई मायूसी है।

गरीबों की भूख तो देखो महंगाई की ताने सुनकर कई शहरों को अपने तलवों से मापी है।

कैदी सी लग रही है जिंदगी करने लगे हैं लोग अपनों से पर्दे पानी कहाँ नसीब हो पा रही है।

हवा की तो बात ही मत करो मौत के बाद कब्र कहाँ नसीब हो पा रही है।

नदियों के धूमिल हुई आँचल बुढ़ापे की गवाही दे रही है फेंक रहे है लाशें ऐसे मानो बाप की जागीरदारी है।

हो रही है चोरी ईमान की चारों तरफ घुसखोरी है बेकारी तो आँखे ऐसे दिखा रही है जैसे अगली सरकार इनकी है।

संकट के इस कालखंड में ये कैसी अनहोनी है ? जल रहा है पूरा शहर औऱ यहाँ सिर्फ मुनाफाखोरी है।

©अमन कुमार(विक्की)