जवानी
बिगुल बजा रणक्षेत्र में समाप्त कर तू हैवानी, देशद्रोहियों के लोहित को बहा जैसे हो पानी। उम्र का स्वर्णिम पड़ाव है मेरी यह जवानी, ऊर्जा से भरी एक अद्भुत नाव है मेरी यह जवानी॥
असुरत्व को मिटा कर तू अपनी मनमानी, विश्वसिन्धु हो बुढ़ापे की बन अमर निशानी। मात-पिता को अर्पित है मेरी यह जवानी, देश के लिये समर्पित है मेरी यह जवानी॥
जीवन को चञ्चल बना तू चिड़ियों सी चहकानी, अप्रतिहत हो आगे बढ़कर फैला तू हैरानी। हर इक को इस बात पे भाती है यह जवानी, जीवन मे घनी अनल लगाती है यह जवानी॥
ऊर्जा को समर्पित कर इस मुल्क को बन जातू सेनानी, समर्पित कर इस गात को बन तू अजर बलिदानी। उम्र मे चार चाँद लगाती है मेरी यह जवानी, यूँ निराली - सी शान दिखाती है मेरी यह जवानी॥
ऊर्जा का दुरुपयोग कर बन न तू अज्ञानी, सबके जीवन को ठग न कर तू कारिस्तानी। हर इक को मदमस्त बनाती है यह जवानी, दोस्तों! कुछ इस तरह से आती है जवानी॥ Alive words of Akarshit.
©#आकर्षित मौर्य
