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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
16 Feb 2021·1 min read·

जय माँ शारदे

माँ शारदे से बस इतना वरदान चाहिए , माँ के चरणों में हैं जगह, ये गुमान चाहिए।

तमस से रहे दूरी सदा, ये भान चाहिए , दुनियां से मिटे अहं, इतना आह्वान चाहिए।

लोलुपता की निरीह अवस्था, अवसादों से परे रहूं, जीवन में बस आपका ही तत्वावधान चाहिए।

रहूं सदा ही आपका ये अभिमान चाहिए , माँ शारदे से बस इतना वरदान चाहिए ।

ज्ञान की अधिष्ठात्री, वीणावादिनी, वाग्देवी माँ सरस्वती को कुमार का चरण-वंदन

आपसभी को वसंतपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं...

© कुमार