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जय माँ शारदे
माँ शारदे से बस इतना वरदान चाहिए , माँ के चरणों में हैं जगह, ये गुमान चाहिए।
तमस से रहे दूरी सदा, ये भान चाहिए , दुनियां से मिटे अहं, इतना आह्वान चाहिए।
लोलुपता की निरीह अवस्था, अवसादों से परे रहूं, जीवन में बस आपका ही तत्वावधान चाहिए।
रहूं सदा ही आपका ये अभिमान चाहिए , माँ शारदे से बस इतना वरदान चाहिए ।
ज्ञान की अधिष्ठात्री, वीणावादिनी, वाग्देवी माँ सरस्वती को कुमार का चरण-वंदन
आपसभी को वसंतपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं...
© कुमार
