जय श्री राम
सुसज्जित मर्यादापुरुषोत्तम को नमन। राममय हुआ आर्यावर्त का कण-कण। जय श्रीराम का हुआ चहुंओर गुंजन। वचनबद्ध हो जिसने किया अपना सर्वस्व अर्पण। वसुन्धरा का जन-जन कर रहा अपने अराध्य का वन्दन। तप, त्याग, सेवा,संयम,साहस, सादगी, समर्पण, संस्कार, शौर्य जिनके जीवन का आधार रहा। वचन पर मिटने को जो सदा तैयार रहा। सर्व हितार्थ जिनका हर क्षण व्यवहार रहा। जिनके मर्यादा से पोषित हुआ, यह धरा धाम। कर्त्तव्य पथ पर सदा जो दृढ़ रहे अविराम। पितृ वचन शिरोधार्य कर, त्याग किए निजधाम। होती इस धरा पर जिनके नाम से, सुबह और शाम। जगत् के पालनहार के चरणों में मेरा प्रणाम। सजे रहे सदा शस्त्र जिसके, दीनों की लाज बचाने को। सत्य वचन की परिपाटी से जगत् को जगमगाने को। छोड़ चले सिंहासन, वसुंधरा का संताप मिटाने को। सत्य, शौर्य, संयम, साहस, समर्पण, संस्कारों की नई बगियाँ सजाने को। आन पडी है क्षण पुनः मर्यादापुरुषोत्तम के आने को। मानव तन से लिपटें क्रूरता के भाव सभी जलाने को। इस वसुधा पर सत्य धर्म की पताका फिर लहराने को। आओ करे निवेदन सभी सियापति को, इस धरती पर अपना प्रभाव दिखाने को।
सबको अयोध्यापति को अयोध्या में अद्वितीय एवं मनोरम रूप में प्रतिष्ठित होने के उपलक्ष्य में हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
