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Siddharth Rana
Siddharth RanaCourseLiteraturePoetry
9 Feb 2021·1 min read·

जीवन का सदुपयोग

दुख से न मुरझाओ दुख ही तो आगे बढ़ाता है अडिग लौ सी बन जाओ फिर देखो प्रकाश अंधियारा कैसे हटाता है

चीर दो सभी कुप्रभावों को मुक्त हो सच्चाई स्वीकार करो जीवन अल्प है अच्छे कार्यों में इसे लगाओ

प्रेरणा विराट से पा गंगा की धारा में बहो हो कोहरा कितना भी घना अपने पथ को कभी न भूलो

जिम्मेदारी बड़ी है द्वंद सुख दुख के तुच्छ हैं हंस हो अपनी पात्रता के अनुसार उत्कृष्ट को ही स्वीकार करो

© सिद्धार्थ राणा