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जीवन का तूफ़ान
ये तूफ़ान है, कुछ पल का मेहमान है हवा तेज है आसमान निस्तेज है
इस तूफान को ढल जाने दो मेहमान को घर जाने दो हवा को बह जाने दो आसमान में धूप निकल जाने दो
तूफान बिना वातावरण उमस से भरा-भरा था बिना मेहमान के सम्बन्ध ठहरा-ठहरा था हवा बिना गर्द-गुबार धरा-धरा था आसमान उजड़ा-उजड़ा था
ये तूफान जीवन की समस्याएँ है मेहमान सगे-सम्बन्धी है हवा व्यवहार है और आसमान हमारे जीवन का रंगमंच है
समस्याएँ जब आती है अपने-पराये का परिचय कराती है व्यवहार के झोंके हँसाती-रुलाती है और सबकुछ इसी जीवन में घटित होती है
© राहुल देवाशीष
