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किसान की व्यथा
महज अफसोस न कर उनपर जो हैं फकीरी भेष में, वरदान-अभिशप्त हैं पर, खुद भूखे रहकर देता हैं अन्न पूरे देश में, <!--more-- दिल्ली तू भी कर ले दोस्ती खेत से, और सब्र न साध उनकी कभी, जिनकी दोस्ती हैं मौसम संग चट्टानों से रेत में, इससे पहले कि कोई भगत सिंह फिर से बंदूके ना बो दे खेत में !
©#कुमार
