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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

कुछ ऐसा हर रोज करें

दधीचि सा अस्थि खोज करो और, ऐसा तुम हर रोज करो !

स्वयं के ही साधक तुम ठहरे मत दो  उड़ने पर  तुम पहरे । पंखों पर ना सिर्फ परवाज़ करो हौसलों  पर  तुम  नाज़  करो ! <!--more-- खुद जला प्रज्वलित ओज करो और, ऐसा तुम हर रोज करो ।

आज गगन में जो तुम लहरे दाग  लगेंगे  सच  में  गहरे । अपवादी का अपवाद करो फिर खुद से ही संवाद करो ! खुद में खुद का सोज़ करो और, ऐसा तुम हर रोज करो।

धुंध को न बनने देना कोहरा गाना तुम हर दिन ही सोहर। खुद में ही वरदान भरो ऐसा कुछ अपना मान करो ! खुद से खुद को राजा भोज करो और, ऐसा तुम हर रोज करो ।

दधीचि सा अस्थि खोज करो और, ऐसा तुम हर रोज करो !

©#कुमार