Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
31 May 2021·1 min read·

लक्ष्यहीन लोग

लक्ष्य,अंजान की तरफ, अंधाधुंध, तीर चला रहे है,लोग; अधीर होकर, दौड़े जा रहे है,लोग;

सुनसान में, कुतूहल है, शमशान में भी, हलचल है, वादियों में, वादीयों का, कहर है;

कायदे,कानून और, धारा की मारामार है, मुख्य धारा से इतर, बहे जा रहे है,लोग।

© राहुल देवाशीष