लक्ष्यहीन लोग
लक्ष्य,अंजान की तरफ, अंधाधुंध, तीर चला रहे है,लोग; अधीर होकर, दौड़े जा रहे है,लोग;
सुनसान में, कुतूहल है, शमशान में भी, हलचल है, वादियों में, वादीयों का, कहर है;
कायदे,कानून और, धारा की मारामार है, मुख्य धारा से इतर, बहे जा रहे है,लोग।
© राहुल देवाशीष
