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माँ भारती
बेटी तुम बेटी नहीं , तुम तो सृष्टि हो, तुम ही सभ्यता, तुम ही संस्कृति हो ।।
सूर्य की किरणें, चाँद की रौशनी हो, तुम ही प्रकृति, तुम ही वाणी हो।।
फूलों की सुगंध, तुम ही विनती हो, तुम ही गीत, तुम ही संगीत हो।।
हवा की कोमलता , धरा की शक्ति हो, हृदय की गति, तुम माँ भारती हो।।
©आदित्य मिश्रा
(सभी बेटियों को समर्पित)
