Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Jan 2023·1 min read·

मैं नया साल हूँ...

लो संभालो मुझे मैं नया साल हूँ ! तुम ना सोचो तनिक मैं नया माल हूँ !

संभालेंगे तुमको तेरी हर बला से, सजाएंगे तुमको एक नई कला से, तुम चाल बदलो मैं नया ढाल हूँ !

पन्ने खाली मेरे तुम लिखो तो सही परिजात का मैं शृंगार हूँ ! लो सजाओ मुझे मैं नया शाल हूँ !

नए रूप में लिपटा पुराना लिबास हूँ नाउम्मीदी का मैं सुखद आस हूँ जीने-मरने का मैं नया काल हूँ !

आनेवाले पल का नया राज़ हूँ कल-परसों नहीं मैं तेरा आज हूँ तुम उधेड़ों मुझे मैं नया खाल हूँ !

इंद्रधनुषी ख़्वाबों का नया साज़ हूँ भटकते दिलों का मैं नया साध हूँ तुम बिखेरो मुझे मैं सुर्ख़ लाल हूँ !

नए मंथन का नया चाल हूँ है कैलेंडर नया मैं नया हाल हूँ नई कोंपल खिलाओ मैं नया डाल हूँ !

छू के देखो मुझे तेरा अहसास हूँ जो मिटा ना सको मैं वो प्यास हूँ तेरे सपनों का मैं नया ताल हूँ !

तुम ना सोचो तनिक मैं नया माल हूँ ! लो संभालो मुझे मैं नया साल हूँ !