माखनचोर
हे ! माखनचोर कन्हैया एक बार फिर आ जाओ।
तंग-गलियों में सिसकती राधिका को बचा जाओ।
हर चौबारों पर कंस खड़े देते हैं ये दंश बड़े ।
इतनी निकृष्ट कुकर्मों पर बेशर्म हँस रहे खड़े-खड़े ?
मानवता की लाश पड़ी हैं आकर इसे लिवा जाओ !
इतने निर्दय विधर्मी को रौद्र रूप दिखला जाओ !
प्यार की परिभाषा तुम आज ज़रा समझा जाओ।
तेरी यमुना मैली तब से स्वच्छता का पाठ पढ़ा जाओ।
©#कुमार
