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Satish Kumar Pandey
Satish Kumar PandeyCourseLiteraturePoetry
5 Sept 2021·1 min read·

मेरी लेखनी में धार दो

हे माँ ! मेरी लेखनी में धार दो, मैं वक्त की रफ्तार लिखू । बुझती हुई चिन्गारी से धधकता हुआ अंगार लिखू । शत्रुओं को खुली चुनौती, अपनों का अमिट प्यार लिखू । मानव जीवन की कथा लिखू । अपने अन्तर्मन की व्यथा लिखू । कायरों की मृत्यु, वीरों का गगनभेदी हूंकार लिखू । हे माँ! मेरी लेखनी में धार दो, मैं वक्त की रफ्तार लिखू । दीनों के हृदय की आर्त पुकार लिखू । रणबाकुरों का हर क्षण जय- जयकार लिखू। दुराचारियों के मृत्यु का फरमान लिखू । अन्याय के विरुद्ध अपना ऐलान लिखू । जिसने जीवन का श्रृंगार किया, उनका सदा सम्मान लिखू । फूलों की खिलखिलाती मुस्कान लिखू । भँवरों की तान लिखू, कोयल की मधुर गान लिखू । पृथ्वी की गंभीरता लिखू, सागर की धीरता लिखू ।

©सतीश कुमार पांडेय