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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
6 May 2021·1 min read·

होगी नई सुबह

अच्छा गुजर गया तो बुरा भी गुजर जाएगा, ये मंजर-ए-खौफ भी कल को उतर जाएगा।

आएंगे नए कोपल फिर से सांखों पर, अभी पतझड़ हैं कल वसंत छाएगा।

एक दूजे को थामे दूर से चलना हैं अभी दूर तलक, कदमों के नए थाप पर तू भी नया कल पाएगा।

होगी नई सुबह कल यकीनन मेरे दोस्त, रख खुद पर तू यकीं सब फिर से संवर जाएगा।

©कुमार