नारी
जिनके रक्त से सृष्टि पोषित है। करके सृजन इस शक्ति का ,देव भी हर्षित है । जिनके त्याग, समर्पण, सेवा, संघर्ष, संवेदना के बदौलत यह धरा व्यवस्थित है। देखकर बलिदान जिनका, परमात्मा भी आश्चर्यचकित है। बलिदान का तेजपूंज, इनके आँचल में पल्लवित है। जिनके रक्त का हर बूँद ,परमार्थ में समर्पित हैं । कभी जगत्तारणी ,कभी शत्रु मर्दनी बनकर अवतरित है। नारी त्याग की प्रतिमूर्ति है। उदासिनता में स्फूर्ति है । इनके वदौलत अक्षय, धरा की संस्कृति है । शौर्य पराक्रम जिनके क्षत्रछाया में पलता है । जिनके वात्सल्य का आधार पाकर जग चलता है । नारी सेवा, संयम ,साहस ,समर्पण, संवेदना, सद्ज्ञान, सद्भाव, सम्मान, सुषमा, संकल्प ,संस्कार की आधार है । यह परमेश्वर का अनमोल उपहार है । जब बनी विदुषि , तो हुआ ज्ञान विस्तार । जब बनी सीता, तो दुराचारियों का हुआ संहार । शब्दों की सीमा में कैसे बंधे वह शक्ति ,जिनका धरा से अंबर तक है विस्तार । प्रकृति के अनुपम सृजन को नमन बारंबार । धन्य यह धरा है जहाँ मानव पलता ,पाकर नारी का आधार । आदि अनादिकाल से इनका कर्जदार रहा संसार । समय के आगोश में झंकृत हो उठता इनका तलवार । गढकर शाहसी संतती करती राष्ट्रीयता विस्तार । जिनके आँचल का छाँव बनता वीरो का औजार । वीरता के रक्त से सराबोर नन्हा बालक भी भरता हूंकार । नारी शक्ति की सदा होती रही जयजयकार ।
© सतीश कुमार पांडेय
