नववर्ष का उमंग
नई उमंग, नई तरंग, नव चेतना का संचार हो । जन- जन के हृदय में उल्लास का विस्तार हो। मायूस चेहरों पर खुशियों की बौछार हो। जिन्दगी के हर मोड़ पर प्रसन्नता का भरमार हो । द्वेषता, दुर्भाव, दूराचार, द्वंद, दीनता, दुष्कर्म का संहार हो । किसी की अस्मद न अब तार- तार हो । राष्ट्र का युवा अब न बेरोजगार हो । अब न कोई भूख से, दम तोड़ने को लाचार हो। अब न किसी के हिस्से में अज्ञानता का संसार हो। प्रत्येक दिलों में,संयम, सेवा, संस्कार, संकल्प, सद्ज्ञान, सद्भाव, संतोष रूपी पहरेदार हो । दूराचारियों का खत्म अब दूराचार हो । राष्ट्र के आँखों से ओझल भूखमरी ,लाचारी, बेरोजगारी, बलात्कारी, आतंकवाद। महामारी,और भ्रष्टाचार हो । श्रेष्ठ कृतित्व का सुदूर प्रांत तक भरमार हो । इस भूमंडल पर भारत वसुन्धरा का गगनभेदी जय जयकार हो । हर सीने में राष्ट्र उत्थान का हूंकार हो ।
©#सतीश कुमार पांडेय
