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Satish Kumar Pandey
Satish Kumar PandeyCourseLiteraturePoetry
30 Dec 2021·1 min read·

नये सफर की तैयारी

अब नये सफर की तैयारी में हूँ। माना मजा हुआ अदाकार नही , फिर भी अदाकारी में हूँ।

मेरे मुस्कान देखकर मुस्कुराते है लोग, उन्हें क्या पता कितने लाचारी में हूँ।

फिर किसी जुल्म/घटना का इल्ज़ाम न आ जाये अपने हिस्से इसी के पहरेदारी में हूँ। भुला के गिलें-सिकवें सभी नई राहों के संग नए सफर की तैयारी में हूँ।