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नेता नगरी
सफ़ेद कबूतरों के झुंड, Election के Season में, हमारे दरवाजे पर आये। डुगडुगी पिटवाये, नये ख्वाब दिखलाये। हमारे पहुँच में, और हमारे वफ़ादार , नजर आये। . Season खतम हुआ, ये अपनी जमात में, लौट गये, ऊँचे कंक्रीट के पेड़ों पर, जाकर बैठ गये, जहां हम इन्हें,ताक तो सकते हैं, टोक नहीं सकते।
