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परिधि
मैं परिधि हुँ मुझे किसी भी आकृति में ढ़ाला जाए किसी भी पैमाने में तौला जाए मैं परिवर्तित नहीं हुँ।
मुझे वर्ग बना दी जाए या आयत या फिर त्रिभुज बना दी जाए मैं सब मे बराबर हुँ।
इसीलिए मुझे कहीं परिधि, कहीं परिमिति तो कहीं परिमाप के नाम से जानते है।
मेरे एकांक ऊँचाई में परिवर्तन मात्र से मैं खुद को कहीं बेलन,कहीं घन तो कहीं घनाभ में ढ़ाल जाता हुँ क्योंकि मैं परिधि हुँ।
©अमन कुमार(विक्की)
