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Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
3 Jan 2023·1 min read·

प्रकृति पतन

नाता तोड़ कर जल और वायु चले पाताल की ओर बे-मौसम बादल बरसे जोर शोर से ठनका ठनके सर्दी गर्मी पल-पल बदले चैत्र मास में लगे कुहासा सावन भादो सूखा-सूखा नदियां रूठी बादल रूठा बांध पोखर पाताल में जन मानस आकाल में प्राच् सभ्यता गर्तावास में जन औषधियां अज्ञातवास में पर्वतें टूटी रही मैदानें लूट रही चहुमुखी और चारों ओर लगी है परिवर्तन की होड़।

©अमन कुमार (विक्की)