प्रेमचंद
प्रेमचंद जैसे लेखक, विरले होते है, गजब की ओज थी, उनकी लेखनी में। जिस तरह उकेरते, जीवन के दृश्य को, सार्थकता एवम् यथार्थता का दर्शन कराते।
मैंने ज्यादा कभी पढ़ा नहीं उनको। बस उनकी एक किताब गबन मेरे पास थी, जिसे मैंने पढ़ने के लिए, मामा के यहां से लाई थी। सोचता था पढूंगा, कुछ कहनिया मैंने पढ़ी भी थी शायद। लेकिन बहुत कम ही याद है। कुछ मैंने प्रेमचंद के बचपन के बारे में पढ़ा था। उनकी जीवनी पढ़ी थी कहीं, कुछ ज्यादा उच्च शिक्षा ले लेने से कुछ नहीं हो जाता। वो थे कुछ चौथी पास, लेकिन लिखते ऐसे थे जैसे भूत के पल सब सामने दिखाते, वास्तविकता आयने की तरह सामने झलकती है उनकी लेखनी से।
लिखने की इच्छा होती थी, मैंने बड़े लेखकों को देखा, लेखनी में रुचि जरूर थी। साहित्य से जुड़ाव था, अन्दर से लगता जरूर था, मै भी लिख सकता हूं। जो मै करने की कोशिश करता हूं, परोसने की वो सारे विचार, सोच एवम् सपनों की उड़ान। प्रेमचंद जैसे लेखक के शक्सियत, अनूठी थी उनकी सहजता।
उनके दर्शन से ही, उनके विचार एवम् उनके लेखनी के स्वाद आने लगे। मैंने कभी पढ़ा नहीं उन्हे, लेकिन अतः आकर्षण थी, जो उनको पढ़ने का मन हमेशा रहता था।
धन्य है उन्हे देखकर लगता हूं, किसी सेलेब्रिटी से ज्यादा ही है, मेरे लिए।
प्रेमचंद हमारे एक मार्ग दर्शक लेखक रहे, बिना पढ़े ही, बिना ज्यादा जाने हुए।
#प्रेमचंद #जीवनदर्शन
©#मिथिलेश कुमार
