← PrevNext →
चाँद
रात की रानी कहूँ या कहूँ निशाचर। बताओ तो जरा ?
कहाँ जाना है तुम्हे और ? किस फतह पर निकले हो ? बताओ तो जरा ?
ओ चंचल मुखड़े वाले मुसाफिर ठहरो तो जरा।
अपनी वो पुरानी लुका छुपी वाली खेल दिखलाकर मुन्ने को बहलाओ तो जरा।
रात की रानी कहूँ या कहूँ निशाचर। अपना परिचय कराओ तो जरा।
©अमन कुमार(विक्की)
