राजनीतिक पंडितों का इम्तिहान प्रारंभ हो जाए
राजनीतिक पंडितों का इम्तिहान प्रारंभ हो जाए । ये भी अब इतिहास और भूगोल समझाए । संसद से पहले संविधान समझ जाए।
ये भी धक्के जरा ट्रेनों में खाए । बेरोजगार होने का इन्हें भी एहसास हो जाए । बिना देश का ज्ञान लिए कोई संसद के दहलीज तक न जाए । देश के विकास के दंभ भरने वाले, सूर्योदय से पूर्व कुछ पसीने तो बहाए।
दूसरों को गद्दार बताने वाले खुद में राष्ट्रीयता तो दिखाए । ऊँचे तालिम की वकालत करने वाले स्वयं ही शिक्षित हो जाए । देश को राष्ट्रीयता समझाने वाले, पहले अपने लाडलो को राष्ट्रीयता बतलाए। उठो भरतवंशियो हम सब एक कानून बनाए ।
राजनीति में कदम रखने वाले पहले सरहद की रक्षा में जाए । अच्छी शिक्षा का दंभ भरने वाले अपने बेटों को सरकारी विद्यालय में पढाए । संसद सा मंदिर में कोई फर्जी डिग्री न पहुचाए। संविधान में हो संशोधन ऐसा, जिससे नेताओं के विलासिता की नींव उखड़ जाए । संसद को हत्यारों से मुक्त कराए।
ख्याल रखो वो जनमानस कोई जाहिल गवार मंत्री न बन जाए । आतंकवाद का कोई वकालत न कर जाए । आओ राजनीतिक प्रवेश परीक्षा का अब माँग उठाए । बने कानून ऐसा जहाँ बिना उत्तीर्ण कोई नेता ना बन पाए ।
किसी निर्णय से पहले उस क्षेत्र का स्वयं ज्ञान संजो के लाए । नेताओं को अब हमसब ज्ञान का महत्व समझाए । लोकतंत्र की गरिमा को हमसब धूमिल होने से बचाए। चयन हो उन्हीं का जो राष्ट्र को सर्वोच्च शिखर तक पहुँचाए ।
जो अपना हर पग विश्व विजय की ओर बढ़ाए । इस धरा पर माता भारती को अमिट पहचान दिलाए । स्वयं का झोली न भरके औरों के हक में आवाज उठाए । जन जन के वेदना का अंत हो जाए ।
©सतीश कुमार पांडेय
