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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

राम

यूँ कहूं तो ये चंदा एक बहाना हैं, जन-जन तक प्रभु राम पहुंचाना हैं !

न कोई होड़ हैं इसमें न कोई जोर ही मानो, हर किसी को बस यहाँ समझो मनाना हैं !

क्या होगा हमारे हजार-पांच सौ लेकर, असल उद्देश्य तो बस माहौल बनाना हैं !

चुनावों पर ये चर्चे तो करेंगें फिर कभी आकर, अभी श्रीराम के खातिर अदद इक घर बनाना हैं !

करेंगे फिर वही बातें धरेंगे रूप बहुतेरे, पहर अंतिम को भी तो मन मंदिर सजाना हैं !

दुबारा कुछ नहीं मिलना सिवा कुछ नेक कर्मों के, मिले अवसाद ना फिर से जतन अंतिम लगाना हैं !

मिले थे कृष्ण जो बनकर वही फिर बुद्ध बन बैठे, हमें कल्कि से मिलने में अभी खुद को लगाना हैं !

मिलेंगे फिर वहीं हमसे जहाँ से छोड़ आए हैं, प्रभु श्रीराम को बस हर युगों तक गुनगुनाना हैं !

©# कुमार