सबसे सुंदर कल्पना
इस संसार में सबसे सुंदर कल्पना क्या है। एक छवि जिसे मानस पटल पर बार बार उतारने की इच्छा हो उसे उगते सूर्य की छवि कह सकते हैं। ऐसा क्या है उगते सूर्य में। हमारे ऋषियों ने सूर्य को आत्मा का प्रतीक माना है कि जिस प्रकार जीवन का भौतिक पक्ष सूर्य पर निर्भर है उसी प्रकार आत्मिक पक्ष हमारी आत्मा पर।
आत्मा को हम नहीं जानते बस पढ़ा है, सुना है, सोचा है परंतु पवित्र आत्मा, श्रेष्ठ आत्मा, देव आत्मा शब्द ऐसे हैं कि आत्मा के गुणों का वर्णन कर रहे हों। जो भी हो उगते सूर्य पर हम ध्यान करें, उन्हें ईष्ट स्वीकार करें तो उस आत्मा तक की प्रगति संभव प्रतीत होती है। वह सकारात्मकता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति हैं जो संपूर्ण प्रकृति को एक सुर में पिरो देते हैं।
ऐसे सूर्य भगवान को ध्यान का आधार मान हम उन जीवनमूल्यों की अपने में स्थापना करते हैं जो आत्मिक प्रगति के लिए आवश्यक हैं। जब सूर्य उगते हैं तो बिना भेद के सब पर बराबर प्रकाश एंव ऊष्मा का संचारण करते हैं। इसी प्रकार हम बनें कि हमारी दृष्टि के सारे भेद मिट जाएँ तथा एकत्व की ओर हम बढ़ें।
सूर्य का एकांत, स्थिरता, कर्तव्यपरायणता, तेजस्विता, आदि ऐसे गुण हैं जो हमारी आत्मा को दर्शाते हैं। उगते सूर्य का ध्यान किसी भी साधक को भ्रांति से बचाता है क्योंकि साधना अपने को साधते रहना है तथा जीवनपर्यन्त हमारी साधना अच्छी चले इसके लिए कुछ मापदंड अवश्य होना चाहिए।
© सिद्धार्थ राणा
