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Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
28 Mar 2025·1 min read·

सफर

सज धज कर निकले थे घर से कम्बख्त सड़क ने रुला दिया ख़ूब झोला गाड़ियों ने थोड़ा कसर धूलों ने पूरा किया छूटते छूटते बची रेलगाड़ी थोड़ा कसर इसके विलंब ने पूरा किया उमस भरी जिंदगी में छूट रहा था पसीना कुछ कसर भीड़ ने पूरा किया जल्दीबाजी में भुल गए टिकट लेने कुछ कसर जंक्शन पर टीटी महोदय ने पूरा किया मन उदास था सूटकेस का वजन भी बकवास था एक रिक्शा मिला वो भी स्वर्गवास पर था घर पहुंचे तो बिजली विभाग उपवास पर था।

©अमन कुमार (विक्की)