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Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

सरकारी

कहने वाले कहते रहें , निकम्मे है सरकारी। आज इस विकट दौर में, काम आये सरकारी ॥

कोई न आते पास मरीज के, दवा पिलाते सरकारी। कोई न इनको हाथ लगाते, मलमूत्र उठाते सरकारी॥

कोई न इनको रोक पाते, पत्थर खाते सरकारी। चौराहों पर चौबीसों घण्टे, पाठ पढाते सरकारी॥

स्कूलों में बारातियों सी, खातिर करते सरकारी। छोड़ परिवार डटे हुये हैं, कर्तव्य पथ पर सरकारी॥

या फिर बच्चे के संग, ड्यूटी पर मां सरकारी। घर रहने की विनती करते, गाना गा कर सरकारी॥

घर-घर जा सर्वे करते, वो बन्दे सारे सरकारी। अपनी कमाई का हिस्सा दें, बिना नाम के सरकारी॥ जोखिम सर पर लिये बैठे, आज सारे सरकारी ॥ Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य