सर्वस्व समर्पण
अपने उम्मीद को थमने न दो , अपने जिद्द को थमने न दो। अपने उम्मीद को परवान दो। हौसलों को सदा उड़ान दो। स्वयं का स्वर्णिम इतिहास रचने को, साहस सभी झोंक दो। बाधा- बिघ्नों का पथ सभी रोक दो। खुद के धमनियों में शौर्य का संचार कर दो। वक्त का ऐलान यह हो रहा ,अत्याचारियों का मान तार-तार कर दो। सुनो शंखनाद संघर्षो का, जुल्मों सितम से अब इस धरा का उद्धार कर दो। मातृभूमि सुसज्जित करने का स्वप्न जो सजाया वीरपुत्रों ने, आज मातृभूमि का वही श्रृंगार कर दो। नव राष्ट्र सृजेताओं के हृदय में कभी न थमने वाला उत्साह भर दो। जो दीन मौन बने बैठे हो ,उनमें हूँकारों का स्वर भर दो। आर्यपुत्रों अपने ज्ञानपूंज से इस जगत् को आलोकित कर दो। सम्पूर्ण बसुन्धरा को बसुधैव कुटुम्बकम् के शरण में समर्पित कर दो। क्षत विक्षत पड़े इस धरती को अब व्यवस्थित कर दो। रणबाकुरों सा स्वयं का सर्वस्व राष्ट्रहित में अर्पित कर दो।
© सतीश कुमार पाण्डेय
