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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
31 May 2021·1 min read·

शहर की भीड़

इतनी भीड़ है, इस शहर में, सुध नहीं,किसी को, अपनी ही,बजह पर।

आगे निकलने की होड़ है,लेकिन सारे रुके हुये है, अपनी ही,जगह पर।

अपने-अपने,सपने के महल में, फँसे हुये से,घुट रहे, अपनी ही,फतह पर।

© राहुल देवाशीष