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शहर की भीड़
इतनी भीड़ है, इस शहर में, सुध नहीं,किसी को, अपनी ही,बजह पर।
आगे निकलने की होड़ है,लेकिन सारे रुके हुये है, अपनी ही,जगह पर।
अपने-अपने,सपने के महल में, फँसे हुये से,घुट रहे, अपनी ही,फतह पर।
© राहुल देवाशीष
इतनी भीड़ है, इस शहर में, सुध नहीं,किसी को, अपनी ही,बजह पर।
आगे निकलने की होड़ है,लेकिन सारे रुके हुये है, अपनी ही,जगह पर।
अपने-अपने,सपने के महल में, फँसे हुये से,घुट रहे, अपनी ही,फतह पर।
© राहुल देवाशीष