शिक्षक दिवस
प्रथम गुरु थे गेनालाल जिन्होंने दिया बचपन को शाल, एक अल्हड़ मदमस्त को दिया ज्ञान तपिश की ढाल ! गुरु रहे हैं वो भी नाम था भोलानाथ, विद्या मंदिर का अनुभव रहा कमाल झा जी के संरक्षण में कतई नहीं मलाल।
जवाहर ने जो गणित बताई, अनुज ने विज्ञान ! दास जी का याराना और, दशरथ का दृष्टांत ! अखिलानंद की अंग्रेजी पोद्दार ने गिटपिट समझाई और, उमेश का दुनियां जहान।
कालक्रम में बढ़े आगे सपनों ने लेकर जो भागे, बदलाव जरूरी यह जान मौलेश्वर के संग जागे, बृजनाथ थे सर्वग्रासी आज भी हैं हर दिलवासी मनोहर जी की दुनियादारी आज भी हैं सबपर भारी।
फिर सूची में नाम जुड़ा और वो थे बदरीनाथ ! कुछ क्षण के विश्राम में मिले थे भैरवनाथ ! संग-संग कुछ अज्ञात का रहा सदा ही साथ, हर आनुपातिक बदलाव में मिला संबल हर हाथ।
फिर बेला ने राजनीति सिखाई बी.एन ने अर्थज्ञान, अंग्रेजी तो घिस-घिस आई हरिहर ने मनोविज्ञान ! आपाधापी तब समझ में आई जब रामकुमार ने हिंदी समझाई, अब वक्त की हर आजमाईश यूँ अंग-प्रत्यंग में हैं समाई।
©कुमार
