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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
7 Jan 2023·1 min read·

श्रीमदभागवतम 1.1.2: महापुराण का परिचय

स्कंध-1,अध्याय-1, श्लोक-2: श्रीमदभागवत महापुराण का परिचय ------------------------------- धर्म: प्रोज्झितकैतवोऽत्र परमो निर्मत्सराणां सतां वेद्यं वास्तवमत्र वस्तु शिवदं तापत्रयोन्मूलनम् । श्रीमद्भागवते महामुनिकृते किं वा परैरीश्वर: सद्यो हृद्यवरुध्यतेऽत्र कृतिभि: शुश्रूषुभिस्तत्क्षणात् ॥ २ ॥ -------------------------------

श्रीमदभागवतम का यह श्लोक स्वयं श्रीमदभागवत महापुराण का परिचय देता है । यह भागवत पुराण भौतिक कारणों से प्रेरित होने वाले सभी धार्मिक कर्म-काण्डों को पूर्ण रूप से बहिष्कृत करते हुए सर्वोच्च सत्य का प्रतिपादन करता है।

यह सर्वोच्च सत्य वास्तविकता(reality) है जो माया(illusion) से पूर्णतः अलग है एवं सबों का कल्याण करने वाला है। श्रीमदभागवतम का संदेश तीनों प्रकार के संतापों-आधिदैविक, आधिभौतिक एवं आध्यात्मिक को जड़ से खत्म करने में समर्थ है ।

महामुनि व्यासदेव ने रचनाकारिता की परिपक्वता अवस्था में भागवत महापुराण की रचना की है। यह पुराण पूर्ण रूप से शुद्ध हृदय वाले भक्तों के लिए आसानी से समझा जाने वाला है। ईश्वर-साक्षात्कार के लिये यह पुराण अपने-आप में पर्याप्त है।

जो कोई ध्यानपूर्वक एवं विनीत भाव से भागवत के संदेश को सुनता है उनके हृदय में परमेश्वर स्थापित हो जाते है ।

हरे कृष्ण !