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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
7 Jan 2023·1 min read·

श्रीमदभागवतम 1.1.3: शुकदेव गोस्वामी का परिचय

स्कंध-1,अध्याय-1, श्लोक 2: शुकदेव गोस्वामी का परिचय ------------------------------- निगमकल्पतरोर्गलितं फलं शुकमुखादमृतद्रवसंयुतम् । पिबत भागवतं रसमालयं मुहुरहो रसिका भुवि भावुका: ॥ ३ ॥ ------------------------------- श्रीमदभागवतम के मूल वक्ता शुकदेव गोस्वामी जी है। श्री शुकदेव गोस्वामी जी श्री व्यासदेव के पुत्र है । श्री शुकदेव गोस्वामी जी जन्म से ही पूर्ण वैरागी और शुद्ध वैष्णव है । इधर श्रीमदभागवतम वैदिक साहित्यों का निचोड़ है।

इस प्रकार वक्ता और शास्त्र दोनों उच्च कोटि का है इसलिये श्रीमदभागवतम की कथा अत्यधिक रोचक हो जाती है। इस श्लोक में 'रसमालयं' शब्द का मतलब रसों के सागर है। प्रामाणिक शास्त्रों में बारह प्रकार के रस बताए गए है-क्रोध,आश्चर्य, शृंगार, हास्य, वीर, दया, दास्य, मित्र, भय, आघात, उदासीन एवं स्नेह।

सम्पूर्ण श्रीमदभागवतम में इन बारहों रसों का समावेश मिलता है । हर स्वभाव के लोगों को श्रीमदभागवतम महापुराण त्राण देने वाली है।

हरे कृष्ण !