सुनहरा हिन्दुस्तान
लालकिले के प्राचीर पर तिरंगे से बढ़कर कोई शान नहीं हो सकता । जो करें अपमान तिरंगे का ,वो किसान नहीं हो सकता । लोकतंत्र का इससे बढ़कर कोई अपमान नहीं हो सकता । ऐसी ओछी हरकतों के कंधों पर, सुनहरा हिन्दुस्तान नहीं हो सकता । आज का दृश्य लोकतंत्र पर भीषण प्रहार है । माता भारती का आँचल हुआ आज दागदार है । तिरंगे की आड़ में ये निर्मम संहार है। अहिंसा का दामन हुआ आज तार- तार है । दुनिया के श्रेष्ठतम लोकतांत्रिक मुल्क पर यह वार है । देख के कृतित्व आज वीरों की शहादत शर्मसार है । सम्भल के रहना वो भारतवंशियो, आपही में पनाह लिए देश के गद्दार है । एहसास कराओ आताताइयों को कि इनसे निपटने को राष्ट्र तैयार है। आज का दिन भारतीय इतिहास में हुआ शर्मसार है । ये आंदोलन नहीं, राष्ट्रीय गौरव पर आघात है । विश्वास की पनाह में,ये भयंकर विश्वासघात है । राष्ट्रीय गरिमा को ताख पर रख दे, ये कैसी जज्बात है । होता आभास ऐसा कि देशद्रोही शक्तियों का आपसी मुलाकात है ।
भारतीय इतिहास में आज तक की सबसे निन्दनीय घटना ।परेड के पनाह से पत्थरबाजी तक का सफर ।
©# सतीश कुमार पांडेय
