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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

स्वदेशी_मौत

क्यूँ मर रहे कोरोना से ये तो विदेशी आघात हैं, अरे मरना हैं तो मरो भूख से ये स्वदेशी बात हैं !

और भी तरीके हैं मरने के क्यूँ परदेशी पर रीझ रहे, जलसमाधि भी हैं त्वरित साध ये भी सरकारी घात हैं !

दर्दो के अंबार पड़े हैं सरकारी आश्वासन में, सड़कों पर मिलती हैं यहाँ जो हर रोज़ के हालात हैं

राहज़नी में विरोध भी हैं आचरण एक आमंत्रण का, और, कोई कम नहीं अपना ये सिस्टम यातायात हैं !

लूटने को अधिकारी हैं अपने क्यूँ चाइनीस अभिलाषी हो, गर्व करो, हर्षित हो जीयो कहो हम भारतवासी हैं !