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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
12 May 2021·1 min read·

तब फिर फाग सजाना तुम

सुना रहा हूँ सुनो कहानी, सुनते-सुनते ना सो जाना तुम !

बेला भले विषम कटे हो, दिनचर्या पर ना रो जाना तुम !

याद तुम्हारी बहुत सुहानी, यादों में ना खो जाना तुम !

यादों के रस्सा-कस्सी में, कसकर मेरा हो जाना तुम !

चंदा-तारों की शीतलता में, बेशक हो रात बिताना तुम !

सूरज के मानिंद नित उगना, पर, ख़ुद को ना कभी जलाना तुम !

अब अध्याय गहन हैं आगे, सपनों में ना आग लगाना तुम !

जब दो जिस्म एक जान हो जाएं, तब फिर फाग सजाना तुम !

©कुमार