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ठहराव
ठहर सी गई है जिंदगी काम कम और आराम ज्यादा है।
लक्ष्यहीन सी दिनचर्या है मेहनत कम और झंझट ज्यादा है।
आगे बढ़ने की कुछ और करने की न ललक रही न ही इरादा है।
© राहुल देवाशीष
ठहर सी गई है जिंदगी काम कम और आराम ज्यादा है।
लक्ष्यहीन सी दिनचर्या है मेहनत कम और झंझट ज्यादा है।
आगे बढ़ने की कुछ और करने की न ललक रही न ही इरादा है।
© राहुल देवाशीष