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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

तिरंगें में

केसरिया और हरे के बीच सफेद में लगा लहू का धब्बा हैं ? कहीं किसी की माँ रो रही कहीं किसी का अब्बा हैं !

चक्र की चौबीसों तीलियों पर होता हर पल प्रहार यहाँ ? जो लिखा हैं संविधान में कोई बताएं ! वो होता हैं कहाँ ?

समरसता का चीर-हरण नित संसद - संवादों में ? वोटों के बाज़ार में देखो क्या होड़ लगी हैं वादों में !

गायब हैं गणतंत्र से गण और तंत्र दोनों का ही भान! कैसे करें अब आम जन इस दिन का सम्मान ?

©# कुमार