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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

2020

2020 तुमसे कैसे नज़र मिलाऊं , खुद से खुद को क्या समझाऊं ! <!--more--

बचे हो जो तुम कुछ थोड़े से , इसे याद करूँ या भूल ही जाऊं !

स्वागत में क्या कमी छोड़ी थी , अब दुनियां को क्या बतलाऊं !

देख लिए कुछ ज्यादा तेरे सपने , शायद इसलिए खोये कुछ अपने !

भूला दिए तू बिष हैं ज्यादा , इसलिए तोड़ दिया स्वागत का वादा !

किया कैलेंडर बीस-बीस के दो फांको में , पीर दिए जो तूने हर सांसों में !

©#कुमार