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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
10 Feb 2021·1 min read·

वैलेंटाइन

देखो कैसा गुलाब लाया हूँ तेरे लिए बाकमाल लाया हूँ ! टैडी सी चाही थी जिंदगी तूने ख़ुद में टैडी का सार लाया हूँ !

तुमसे वादा एक निभाई ना गई मैं जिंदगी से वादा उधार लाया हूँ ! तेरे आलिंगन को देख निस्तेज मैं अंको का पूरा बाज़ार लाया हूँ !

ये सिर्फ़ सात दिनों में समाये कैसे मैं सात जन्मों का हिसाब लाया हैं ! तुमने जो खत लिखे भी नहीं मैं उसका भी पूरा जबाब लाया हूँ !

© कुमार