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Satish Kumar Pandey
Satish Kumar PandeyCourseLiteraturePoetry
10 Aug 2021·1 min read·

विजय दिवस

वीरों ने लगा दी जान की बाजी, दुश्मन को धूल चटाने में । रहे कामयाब ,शत्रुओं के वक्ष को चिरकर ,राह बनाने में । पाँव न डगमगाने दिया, लहू का आखिरी कतरा तक बहाने में । रिश्ते-नाते की भेंट चढ़ा दिये, मातृभूमि का फर्ज निभाने में । तन-मन का सुख वार दिये,माँ का आँचल बचाने में । शत्रु खेमे को एहसास कराये,हस्र क्या होगी आर्यावर्त से टकराने में । जिन्हें गोलियों की बौछार भी न रोक सकी,भारत माता की जय जयकार लगाने में । देख के रणधिरों का शौर्य, शत्रु खुद को महफूज समझे मूँह की खा जाने में । गुंजयमान हुआ ,हिन्दुस्तान के रणबाकुरों का रणकौशल जमाने में । हुआ एहसास उन्हें, भारत का कोई सानी नहीं मित्रता या शत्रुता निभाने में । हर दौर में शौर्य, साहस, त्याग, संयम के अमिट ध्वाजा ले रहे प्रतिष्ठित जो जमाने में । हम विश्वास करते हैं, सिंहों के शिकार कर उसपर आरूढ़ हो जाने में । इस मिट्टी की छोटी चिन्गारी भी अधिक है,दुश्मनों को निश्त नाबूद मिटाने में । आओ जरा याद करले उन्हें,जो मर के भी अमर हो गये जमाने में । अपना सर्वस्व वार दिये, हमसब का मान- सम्मान बढ़ाने में ।

समस्त देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई ।

©सतीश कुमार पांडेय