वक्त
वक्त करता है सबका हिसाब । धरासाई हो जाता, विश्वविजयी का ख्वाब । हुआ भीषण युद्ध वही, जहाँ मद में चूर हुआ युवराज। समय ने प्रलय नृत्य किया वहाँ , जहाँ मौन रहा सम्पूर्ण समाज। प्रकम्पित करता सिहांसन वही, जो सदियों से दबा है अवाज । वक्त परिवर्तन का ऐलान है । वक्त के आँचल में शरण लेता, वीरों का महा अभियान है । नजर उठा के देख लो,वक्त के चरण में शरण लिए सभी महान है । वक्त में होता बदलाव हर वक्त, वक्त की यही पहचान है । वक्त ही बनाता रंक, वक्त ही बनाता सम्राट महान है । मानव के रग- रग में व्यर्थ समाया अभिमान है । वक्त की बेडियो में जकड़ा सारा जहां है। सृष्टि के कण कण में गुंजित ,वक्त का जयगान है । वक्त कल भी महान था, वक्त आज भी महान हैं ।
©सतीश कुमार पांडेय
