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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
2 Jul 2021·1 min read·

काम और परिवार में बैलेंस कैसे बनायें ?

काम के बोझ और अपने व्यस्त दिनचर्या की वजह से अक्सर हम अपने परिवार को समय नहीं दे पाते है। सबेरे घर से निकलना और देर रात घर आना यह हमारी मज़बूरी होती है।

शहर में रहनेवालों के ऑफिस अक्सर दूर में होते है। उनका समय पर काम पर पहुँचना और ओवरटाइम या किसी अन्य कारणवश देर से घर लौटना हमेशा बना रहता है। इस कारण वे अपने परिवार को समय नहीं दे पाते है।

बिजनेस करने वालों को अपनी दुकान पर अधिक समय देना पड़ता है। ग्राहक का आना-जाना जब तक बना रहता है तब तक उन्हें फुर्सत नहीं मिलती है। इसके बाद जब वे घर आते है तो खा-पीकर सो जाते है। परिवार को समय नहीं दे पाते है।

जिनके पास जॉब या बिजनेस नहीं है उनके पास इतना ज्यादा समय है कि वे परिवार के तानों से बचने के लिये घर से बाहर ही अपना समय बिताते है।

इस प्रकार कोई समय की कमी के कारण परिवार को समय नहीं दे पाते तो कोई अत्यधिक समय के कारण ऐसा नहीं कर पाते है। परन्तु दोनों परिस्थितियों में हमारा परिवार बिगड़ जाता है।

दरअसल परिवार उसी का होता है जो उसे पोषण देता है। अगर हम उसे पोषण नहीं दे पाये तो टीवी, मोबाईल, आदि उसे पोषण देंगे। अगर अपने बच्चों को हम सत्संग नहीं दे पाए तो कुसंग उसे प्राप्त होंगे। इन्हें जैसा संग मिलेगा इनपर वैसा ही रंग चढ़ेगा।

अतः प्रश्न है कि इन टूटते परिवार को कैसे बचाया जाय। जिसका जवाब है समय का प्रबंधन किया जाय।

समय प्रबंधन एक कला है जो अगर नहीं आती है तो इसे सीखा जा सकता है। वैदिक शास्त्र इन्हें सीखने का सर्वोत्तम साधन है।

© राहुल देवाशीष