Rahul Devashish

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3 Feb 2021·2 min read·12

डरावना कलयुग

'धर्म के पीछे के राज' के पिछले अंक(EP3) में हमने व्यक्ति, वस्तु और स्थान के धार्मिक स्वरुप को जाना। वे अपने-अपने धर्म का पालन प्रकृति के तीन गुणों-तमोगुण , रजोगुण एवं सतोगुण से किस प्रकार प्रेरित होकर कर रहे हैं ये हमलोग आज जानने का प्रयास करेंगे। <!--more-- वर्तमान युग कलयुग है। इसे कलह का यानि लड़ाई-झगड़े, चोरी-बेईमानी, अपराध, आस्था संकट का युग माना गया है। कलयुग ने अभी केवल अपना 5000 साल पूरा किया है। शास्त्रों के अनुसार इसे अभी 4 लाख कुछ साल पूरा करना है। मतलब, कलयुग अभी बचपने में है, जब यह और बढ़ेगा तो समाज में जो घटना घटेगी उसका स्वरुप और भी भयंकर होगा।

हम आपको डरा नहीं रहे है बल्कि सत्य से अवगत करा रहे है। शास्त्रों की बातें सही निकलती है इसलिए कलयुग के लक्षण और इसके विस्तार के बारे में जो भविष्यवाणी की गयी है वे भी सत्य होंगी। वर्तमान में समाज में घट रही घटनाओं के आधार पर हम अंदाजा लगा सकते है कि आने वाला समय और समाज का स्वरुप कैसा होगा। हम इनकी विस्तृत चर्चा आने वाले लेखों में करेंगे।

आज अपने विषय प्रकृति के तीन गुणों-तमोगुण , रजोगुण एवं सतोगुण के बारे में हम बातें करते है। धातु के सन्दर्भ में समझने का प्रयास करें तो तमोगुण-लौह , रजोगुण-चाँदी एवं सतोगुण-स्वर्ण के सामान है। व्यवहार के सन्दर्भ में बात करें तो तमोगुण-क्रोध, रजोगुण-दान एवं सतोगुण-तपस्वीपन है। देव तत्व के बारे में बात करें तो तमोगुण-शिव तत्व , रजोगुण-ब्रह्मा तत्व एवं सतोगुण-विष्णु तत्व का प्रतिक है।

प्रकृति के ये तीनों गुण हर समय एवं हरेक व्यक्ति, वस्तु एवं स्थान में समाहित होते है। पाई चार्ट पर जब इन तीनों गुणों को प्रदर्शित करेंगे तो चार्ट तीन भागों में विभक्त होगा। ये तीनों अलग-अलग मात्रा में दिखाई देंगे। इनकी मात्रा फिक्स्ड नहीं होगी बल्कि यह घटता ,बढ़ता रहता है।

प्रकति एक तीनों गुण समय, स्थान एवं परिस्थिति के अनुसार अपना प्रभाव दिखाते है। उदाहरण के लिये एक व्यक्ति कभी हड़पने वाले मूड में , कभी दानशील तो कभी विरक्ति के मूड में नजर आते है। हरेक व्यक्ति, वस्तु एवं स्थान में तमो,रजो एवं सतो गुणों को नियंत्रित करने वाली एक शक्ति है जिनका नाम 'माया' है। माया के वश में तमो,रजो एवं सतो गुण कार्य करती है तथा इन गुणों के वश में व्यक्ति,वस्तु एवं स्थान कार्य करते है। माया सुप्रीम बॉस यानि भगवान के वश में कार्य करती है। इस प्रकार नियंत्रण का पदानुक्रम(Hierarchy) पूरा होता है।

कोई व्यक्ति अपने धर्म का कितना पालन करेगा यह इन गुणों के द्वारा उस व्यक्ति पर पड़ने वाले प्रभाव निर्धारित करते है। तमो , रजो एवं सतो गुण में से जिसे वह व्यक्ति जितनी मात्रा में अवशोषित करेगा उसी के अनुसार उस व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरेगा। व्यक्ति का व्यक्तित्व निर्धारित करता है कि वह धर्म करेगा या अधर्म। वह व्यक्ति मानवी व्यवहार करेगा, न्यूट्रल रहेगा या दानवी व्यवहार करेगा यह भी यही निर्धारित करता है ।

अगले अंक में व्यक्ति द्वारा प्रकृति के तीनों गुणों के अवशोषण एवं मानव व्यवहार पर पड़ने वाले असर की बात करेंगे।जानते रहिये-'धर्म के पीछे का राज'।

©#राहुल देवाशीष

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