मस्ती के साईड इफैक्ट-गलत आदत सुधारिये
पहले 'आर्ट ऑफ लिविंग' के क्लास में जब मैं जाया करता था तो वहाँ एक बात बार-बार बताया जाता था -इंद्रिय संयम।मुझे हँसी आती थी-ये आउटडेटेड बातें सुनकर । मैं सोचता था -ये धर्म,अध्यात्म वाले लोग कभी भी मॉडर्न नहीं बन पाएंगे।इन बेचारे का न तो पोथा-पोथी पढ़ने का आदत जाएगा और न ये लोग कभी एडवांस बन पाएंगे।वही धोती-पाजामा और माला बांधने में ये लोग रह जाएंगे।
क्लास से निकलकर जींस के पिछले पॉकेट में मोबाईल रखता था,कान में हेडफोन खोंसता था,मुँह में गुटका डालता था और आँख सेंकते हुए रोड पर निकल पड़ता था।आँखों में भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद जी की तस्वीरें नाचती रहती थी।क्रांतिकारी छवि के लिये भाई लोगों के बीच जाना जाता था।खून गरम था और सोच इतनी मारक थी कि जो आयेगा उसी को चीर देंगे,फाड़ देंगे,भीतर ठेल देंगे।कोई टोकता था तो बड़े रोब से जबाब देता था-"तेरी क्यूँ फटती है बे साले? चुपचाप अपने रास्ते जा नहीं तो जहां से निकला है वहीं घुसा देंगे।
मोबाईल में देसी और विदेशी दोनों तरह की क्लिप हुआ करते थे जो अस्लील हरकत करने की ट्रेनिंग दिया करती थी।मुहल्ले के साईबर कैफे वाले को पता था कि भाई को इस हफ्ते कौन सा चालीसा देना है-देसी वाला या विदेसी वाला;वह डाऊनलोड करके रखता था।
कुछ सालों के बाद हेडफोन लगाने पर कान में सांय-सांय की आवाज आने लगी उसे चेक करवाया तो डॉक्टर ने बताया पर्दा डैमेज हो गया है परहेज करो,इस प्रकार हेडफोन से हाथ धोना पड़ा।दांत का मसूड़ा गुटखे ने खा लिया तो उसकी RCT(Root Canal Treatment) करवानी पड़ी।वीडियो क्लिप ने आँख में चश्मा लगवा दिया।चीजें याद नहीं रहनी लगी तो sicky notes बनाकर दीवारों पर चिपकाने लगा।ये सब मेरी मस्ती के साइड के इफैक्ट थे।
दोस्तों ,अगर आप भी ऐसे मजे में जी रहे है तो संभल जाएँ।याद रखें कोई भी रिपेयर की हुई चीज आरिजिनल जैसी नहीं चला करती।जब भगवान जी द्वारा असेम्बल्ड अंग एक बार खराब हो जाएंगे तो डॉक्टर के पास जाकर उसे चेक करवाने और उसकी रिपेयर करवाने में पूरी जिंदगी खप जायेगी।
अगर अच्छी जिंदगी जीनी है तो नशा छोड़ो,हस्तमैथुन छोड़ो,असंयमित सेक्स करना छोड़ो,इंद्रिय संयम करो।
