नूतन वर्षाभिनंदन
अभी आशाओं का दौर है, देखो... उम्मीदें चहुँओर है !
चलो मान ले अब बीती काली रात, उजाले का दामन लिए ये नया भोर है!
नए साल में मिले मंजिलें सबको, बस...हर ओर बधाईयों का शोर है!
लेकिन है कुछ अनसुलझे सवाल ! चाहता हूँ मिट जाय हर एक बवाल?
बेटियाँ ना अब अत्याचार सहे ! बेमतलब सीमा पर ना ख़ून बहे ?
शांति, सुख और संवृद्धि रहे ! नैतिकता ना यूँ घुट-घुट कहे ?
इंसानियत दो कौड़ी ना बिकने पाए ! किसानों के घर ना कोई मातम छाए ?
दिन है 'रवि' और 'सूर्य' के प्रतीक "तेज" यह नया साल आपसबों को खूब हरसाए !
©कुमार भूपेश
