लोग हैं
तू अपनी खूबियां ढूंढ …. कमियां निकालने के लिए लोग हैं ।
अगर रखना ही है कदम…. तो आगे रख , पीछे खींचने के लिए लोग हैं ।
सपने देखने ही है ….. तो ऊंचे देख , नीचा दिखाने के लिए लोग हैं ।
अपने अंदर जुनून की…. चिंगारी भड़का , जलने के लिए लोग हैं ।
अगर बनानी है….. तो यादें बना , बातें बनाने के लिए लोग हैं।
प्यार करना है…. तो खुद से कर , दुश्मनी करने के लिए लोग है ।
रहना है…. तो बच्चा बनकर रह , समझदार बनाने के लिए लोग है ।
भरोसा रखना है…. तो खुद पर रख , शक करने के लिए लोग हैं ।
तू बस सवार ले… खुद को… आईना दिखाने के लिए लोग हैं ।
खुद की अलग… पहचान बना…. भीड़ में चलने के लिए लोग है ।
कुछ करके दिखा…. दुनियाँ को….. तालियाँ बजाने के लिए लोग हैं ।
©#आदर्श मौर्य
