Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·3 min read·

नंदी हिल, बंगलौर

नंदी हिल स्थित है, बंगलौर सिटी के बाहरी छोर पर। जाती है रास्ते हेब्बल से, केंपागौड़ा एयरपोर्ट से आगे। घूमती हुई घेरा मराते, पहुंचती है गाडियां सब। टिकट घर के पास, गाड़ी लगाया वहीं पे। ऐसे मै यहां तीसरी बार जा रहा था, शायद दो बार और गया इसके बाद। शादी के बाद पत्नी के साथ पिकनिक व सैर सपाटे के लिए। यह एक पसंदीदा स्थल थी हमलोग की, नंदी हिल..!!

कुछ लड़कों की झुंड, चले थे साथ हम। सुबह के तीन बजे, सभी कोलकाता के मित्र। नंदी हिल पे कुहरा थी छाया, सभी मजा से चढ़ाई की।

सुन्दर एवम् विशाल लग रही थी अकाश, नीचे सभी छोटे छोटे। प्राकृतिक वातावरण था, जंगलों के बीच में पेड़ पर घर है। अच्छे रंगिले झूले, कलाकृतियां, मजा से हमलोग फोटो लेते बढ़ते गए।

कुहाशा था, सूर्य की पहली किरण का इंतजार। इंतजार भी दूर हुई, सभी साफ़ साफ़ दिखने लगा। हमलोग सुसाइड पॉइंट पर भी, फोटो लिए। बगल में एक सांप थी, उसका भी।

सभी अच्छा लग रहा था, सूरज को पकड़ रहे थे हमलोग गोल कर, मिला तर्जनी और अंगूठा। बादल इतनी बगल में, रुई सी मानो हम सभी को सहला रही हो। विभोर्मई दृश्य थे, वहां काली के पुरानी मंदिर भी थी। जो इंगित करता था, कोई तपस्वी रहे होंगे। मां के दर्शन सभी ने की। ढेर सारी मस्ती भी, हमलोगो ने।

एक स्नानागार थी, सीढ़ियां बनी थी, टीपू सुल्तान यहां आते थे छुट्टियां बिताने, अपनी रानियों के साथ।

सभी लिखे थे, पत्थर की दीवार पर। मेन गेट पर बंदरो का झुंड, अपने बच्चो को पेट में चिपकाए शैतानी कर रही थी सब।

गजब का खुमार था, सभी बंदरो के फोटो, साथ में फोटो खींचा रहे थे, किसी सेलेब्रिटी से कम नहीं थे।

बहुत मनोरम थे वो दृश्य, हमलोग लौट रहे थे, हल्की धूप आ गई थे, हमलोग कुछ फास्ट फूड लेकर, सभी अपने अपने बाइक से थे। मै भी अपनी बाइक से।

एक मित्र जो बहुत जूनियर था, मुझसे मेरे गाड़ी ड्राइव करने के लिए कहा। मैंने उसे अपनी गाड़ी दी, लगे रेस करने अपने में। थे वो लोग रेसर, कोलकोता की सड़कों के।

मेरी फटफटिया हवा से बात कर रही थी, करीब दो घंटे में थे हमलोग हेब्बल, जहां से चले थे। लेकिन अंत में एक घटना घट गई, रोड पर तीक्ष्ण कोना लिए, रोड की दो स्लैब ऊपर नीचे थोड़ा ज्यादा थी। हालांकि मैंने उसे मना कर रहा था, वो लड़का तो अपनी धुन में था, मै मन ही में हनुमान चालीसा पढ़ रहा था, मन ही मन। मै अपनी गाड़ी को रोक नहीं पा रहा था, चाहते हुए भी। एक बार गलत हाथो में जाने के बाद अच्छी चीजे भी कंट्रोल में जल्दी नहीं आती।

रेस करती मेरी गाड़ी, हवा में बिखेर गई। हम पिछे बैठे थे, कहीं फेंका गए। जान बच गई मेरी, सभी नई गाड़ी, जैकेट, घड़ी चूर चूर हो गई। मुझे हल्की चोट भी आयी। हॉस्पिटल गए जो मेरी गाड़ी चला रहे थे। मै बाल बाल बच गया था। राको राघो सईया, मार सके ना कोई, सटीक बैठ रहीं थी।

अपनी गाड़ी तो जा चुकी थी लगभग। बाद में इससे बनवाया, अच्छा खर्च लग गए, किसी मित्र ने कोई सहायता नहीं की। दोस्ती सोच समझ के करनी चाहिए, यह सीख तो मिली ही।

एक और सीख मिली, फ्रेशर पर विश्वास आंख मूंद नहीं करनी चाहिए। जिंदगी में जोश के साथ होश भी रखना जरूरी है। जीवन में अनुभव का महत्व है।

यही जिंदगी है, आगे निकल गई। मैं यहां बैठ लिख रहा हूं। उन यादों को पन्ने में सहेज रहा, परोस रहा आप लोगो को।

#छोटिकाहनियां

©#मिथिलेश कुमार