Narendra Prasad Nirala
Narendra Prasad NiralaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

न श्रम प्रधान, न कर्म प्रधान

न श्रम प्रधान, न कर्म प्रधान, है यहाँ चापलूस महान्  ।।

न ज्ञानी प्रधान, न ध्यानी प्रधान, है यहाँ अशिक्षित महान्  ।।

न किसान प्रधान , न व्यापारी प्रधान, है यहाँ बिचौलिया महान्  ।।

न रोगी प्रधान , न योगी प्रधान, है यहाँ लापरवाह चिकित्सक महान्  ।।

न जाति प्रधान, न धर्म प्रधान, है यहाँ राजनेता महान् ।।

आप भी प्रधान, वे भी प्रधान, क्या हमें बनना चाहिए, ऐसा महान्  ??

©#नरेन्द्र प्रसाद निराला