उनकी यादें
कि मै आज भी उनको कहाँ भूल पाया हूँ , मै तो आज भी उनकी यादों में यूँ ही खोया हूँ।
मानो जैसे जल मे नमक मिल जाये , मै तो वैसे ही आज भी उनमें खोया हूँ।
अर्सो हो गये गमों मे जिए, मै तो आज फिर से मुस्कुराया हूँ।
बिछड़े तो हम बहुत पहले से है, किसी को खबर भी कहाँ है से है।
लेकिन जब मिला हूँ उनसे, तो मुझे लगा ही नहीं कि बिछड़ा हूँ उनसे।
हर रातों में उनका इन्तजार रहता है, सपनों मे आयेगी बस इसी का ख्याल रहता है।
जब तक नींद मे रहता हूँ मैं, तब तक उसके पास रहता हूँ मैं।
आँखे खुलने के बाद वो सामने कहाँ आती है, वो तो बस सपनों मे ही मुझसे मिलने आती है।
हकीकत मे तो कभी दर्शन नही होते उनके, सिर्फ़ सपनों मे ही बाते होती है उनसे।
नींद टूटने के बाद हम फिर से बिछड़ जाते हैं, उनसे मिलने के लिए फिर से तरस जाते हैं।
फिर से वही रातों का ख्याल रहता है, हम सपनों मे मिलेंगे यही मलाल रहता है।
लोग कहते हैं रात गयी वो बात गयी, लेकिन उनकी यादें आज भी नहीं गयी।
अर्सो हो गये गमों को छुपाये, हम तो आज भी उनकी यादों में खूब मुस्कुराये।
दिन यूँ ही निकल जाता है फिर से रात आ जाती है, जैसे ही आती है रात बस उनकी याद यूँ ही आ जाती है।
भूल नहीं पाया हूँ उनकों, आज भी उनकी यादों में खोया हूँ, मै जी भर के आज फिर से रोया और मुस्कुराया हूँ। ©#अमरेश गिरि
